
वृंदावन के पुरानी कालीदह स्थित अखंड दया धाम आश्रम में परम पूज्य स्वामी श्री भास्करानंद जी महाराज द्वारा कही गई सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा संपन्न हुई। इस कथा का आयोजन नागपुर से आईं मुख्य यजमान श्रीमती लीलावती तुकाराम घोटे और अन्य भक्तगणों के माध्यम से हुआ।
स्वामी भास्करानंद जी महाराज ने कथा के जरिए लोगों को श्रीमद् भागवत की महिमा और इससे जुड़े विभिन्न प्रसंगों के बारे में विस्तार से बताया। कथा के अंतिम दिन अपने प्रवचन में महाराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं के साथ रुक्मिणी के विवाह आदि का विस्तार से वर्णन किया।
भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का बखान करते हुए स्वामी भास्करानंद जी ने श्रद्धालुओं को सच्ची भक्ति के बारे में विस्तार से बताया। उनके अनुसार यदि किसी व्यक्ति को परमपिता परमेश्वर की कृपा को प्राप्त करना है तो उसे भगवान कृष्ण की गोपियों की तरह समर्पित भाव से अपने आराध्य की साधना करना होगा।
महाराज श्री ने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करने को कहा। महाराज श्री ने कथा के यजमान और भक्तों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके द्वारा सात दिनों तक सुनाई गई कथा तभी सार्थक होगी जब सभी लोग इससे जुड़ी अच्छी बातों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे।
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान साध्वी श्री कृष्णानंद जी द्वारा प्रस्तुत किये गये भजनों को सुनकर भक्तगण मंत्रमुग्ध होकर झूमते—नाचते नजर आए।
एक ओर जहां फाल्गुन मास में पूरा ब्रजमंडल होली के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा था तो वहीं दूसरी तरफ इस भागवत कथा का भक्तिमय माहौल लोगों को अपनी तरफ बरबस खींच ला रहा था। यही कारण है कि न सिर्फ आस-पास बल्कि दूसरे प्रांतों से आए हुए लोगों और ब्रजमंडल के गणमान्य संतों ने भी इस संगीतमय कथा का रसपान किया।
श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन अखण्ड दयाधाम आश्रम में भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें वृंदावन के कई गणमान्य संतों के साथ श्रद्धालुओं ने भी प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।